google.com, pub-4591989099299328, DIRECT, f08c47fec0942fa0 डमरु बोले रे शिव शंकर भोलेनाथ का|| LYRICS

डमरु बोले रे शिव शंकर भोलेनाथ का|| LYRICS

डमरु बोले रे शिव शंकर भोलेनाथ का|| LYRICS 



डमरु बोले रे शिव शंकर भोलेनाथ का
 डमरू भोले डमरू भोले डम डम डम डमरू भोले रे
छम छम छम छम भोला नाचे
 डम डम डमरू बाजे
आई है महाशिवरात्रि मग्न हुए शिव भोले
बाज रहे हैं शंखनाद हो भेद व मन का खोलें
धूम मची है तीन लोक में भूमंडल सब डोले फिर क्या हुआ फिर
फिर फिर डमरु बोले रे क्या कहना उनकी बात का
महादेव देवों के देव वह शिव भोला भंडारी 
वह चाहे पल में जो कर दे उनकी लीला न्यारी 
संग विराजे महा सती और गोरा प्यारी प्यारी
 उन्हीं के गुण गाती है भक्तों यही दुनिया सारी 
फिर क्या हुआ फिर डमरु बोले रे शिव शंकर भोलेनाथ का
त्रिलोकी अंतर्यामी है सारे जग के स्वामी
मेष धरे सन्यासी का शिव शंकर घट वासी 
उन्हीं की महिमा गाती है यह भक्ततों दुनिया सारी
 दर्शन देते हैं शिव शंभू है कैलाश के वासी 
मन मेरा डोले रे शिव शंकर की पुकार में
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