LYRICS
सत्संग बिन मेरा जी ना लगे कागज की नाव पानी में तरे मेरे जीवन की नाव सत्संग से तरे बागों के फूल पानी से खिलें मेरे हृदय का फूल सत्संग से खेलें
कपड़े की मैल साबुन से धुले मेरे हृदय की मैल सत्संग की धुले
चूल्हे की आग पानी से बुझे मेरे हृदय की आग सत्संग से बुझे कमरे का ताला चाबी से खुले मेरे हृदय का टाला सत्संग से खुले

0 टिप्पणियाँ