सर पे रख के मटुकिया दही वारी krishna bhajan hindi lyrics



LYRICS

चली धरके मटकिया दही वाली 
ग्वालन जब घर से चली कर सोलह श्रृंगार 
नैनो में कजरा लगाया गले में पहना हार 
ओढ़े लाल चुनरिया की कोर काली 
सर पे धरके मटकिया दही वाली 

सर पे गगरी धार लायी 
चुनरी लयी संभाल जल्दी जल्दी चलन लगी 
वे सब सखियाँ के साथ 
तभी मिल गए सांवरिया गिरधारी 
चली धरके मटकिया दही वाली 

रुको जरा ठाड़ी रहो सुनो हमारी बात 
इतना क्यों घबरा रही हम लगते रिश्तेदार 
तुम तो लगती हमारी छोटी साली 
चली धरके मटकिया दही वाली 

इतने में घनश्याम ने मटकी लयी उतार 
थोड़ा थोड़ा ग्वालो को बांटा 
थोड़ा लिया बचाये 
अपुन पि गए वो मटकिया वे गिरधारी 
चली धरके मटकिया दही वाली 

ग्वाल बाल सब मिल कर के 
करने लगे विचार 
केसा है ये लाडला नटवर नन्द कुमार 
चलो अपनी बना ले अलग टोली
चली धरके मटकिया दही वाली 

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