Na jane hame unki kya cheez pasand aaye lyrics

Na jane hame unki kya cheez pasand aaye lyrics



Na jane hame unki kya cheez pasand aaye lyrics

 ना जाने हमें उनकी 

क्या चीज पसंद आये  

छोड़े तो जिए कैसे 

अपना ही तो रुसवाई


खिड़की के झरोखों से 

हम ताकते रहते हैं 

कब नींद से जागे वो  

और कब लेंगे वह अंगड़ाई


दरिया के किनारे पर 

बैठे हैं तमाशाई 

जब डूब रही कश्ती 

गहराई नजर आई


बिस्तर की सलवटो से 

महसूस हो रहा है 

तोड़ा है दम किसी ने 

करवट बदल बदल के


महफिल में वो आ जाएं 

आ जाती है रोनक सी 

जब जाते हैं महफिल से 

तन्हाई नजर आई

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