जीवन के दिन सब बीत चले HINDI LYRICS

जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं 
तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं

वर्षा की रिमझिम बूंदों में काली घनघोर घटाओं में
सावन की इस हरियाली में लहराती ललित लताओं में
झर-झर करते इन झरनों में नदियों की इन धाराओं में
आनंद ना बिल्कुल आता है अब इन प्राकृतिक छटाओ में
इस सुंदरता से मतलब क्या जब पास मेरे घनश्याम नही

जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं
तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं

दुनिया की इस फुलवारी में जब वह बसंत ऋतु आती है
फूले-फूलो को देख-देख दिन रात धड़कती छाती है
भंवरे जब गुंजन करते हैं कोयल जब कूक सुनाती है
मीठी-सी तुम्हारी वो बोलन घुंघरावली तेरी वो अलकन
जब याद मुझे आ जाती है आहा करके रो उठता हूं मैं
फिर चैन है आठों याम नही फिर चैन है आठों याम नहीं 

 जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं 
तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं 

जब शरत्चंद्र नभमंडल को अपनी किरणों से धोता है
प्रेमी चकोर निज प्रीतम के दर्शन कर हर्षित होता है
जब खुली चांदनी में सारा संसार सुखी हो सोता है
उस वक्त मुझे है नींद कहां दिल तड़प-तड़प कर रोता है
श्री कृष्णचंद्र मुखचंद्र बिना इस शरद् चंद्र से काम नहीं

 जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं 
 तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ