सावन में झूला झूल रहे Lyrics – राधे संग कुंज बिहारी | Krishna Jhula Bhajan Lyrics

सावन में झूला झूल रहे, राधे संग कुंज बिहारी भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य लीलाओं का वर्णन करने वाला एक अत्यंत मधुर और लोकप्रिय सावन स्पेशल कृष्ण भजन है। इस भजन में वृंदावन की हरियाली, कदंब के वृक्ष, कोयल की मधुर कूक और राधा-कृष्ण के झूला उत्सव का मनोहारी चित्रण किया गया है। सावन, झूलन उत्सव, जन्माष्टमी, राधाष्टमी और श्रीकृष्ण भजन संध्या में यह भजन विशेष श्रद्धा और प्रेम के साथ गाया जाता है।


सावन में झूला झूल रहे Lyrics in Hindi

सावन में झूला झूल रहे, राधे संग कुंज बिहारी।
राधे संग कुंज बिहारी, राधे संग कुंज बिहारी॥

अंतरा – 1

मोर मुकुट, कानन में कुंडल,
रूप निहारत सब ब्रज मंडल।
कर दर्शन सुध-बुध भूल रहे,
राधे संग कुंज बिहारी॥

अंतरा – 2

बाँकी झाँकी है प्यारी,
बाँके नंदलाल की।
मीरा दीवानी हो गई,
गिरिधर गोपाल की।
कर दर्शन सुध-बुध भूल रहे,
राधे संग कुंज बिहारी॥

अंतरा – 3

कूक रही है कोयल कारी,
लता-पता छाई हरियाली।
और महके कदंब के फूल रहे,
राधे संग कुंज बिहारी॥




भजन का अर्थ

"सावन में झूला झूल रहे, राधे संग कुंज बिहारी" भजन सावन ऋतु में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दिव्य झूला उत्सव का सुंदर चित्रण करता है। इसमें ब्रजभूमि की हरियाली, कदंब के वृक्ष, कोयल की मधुर कूक और श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। यह भजन भक्तों को राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीलाओं का आनंद लेने और उनकी भक्ति में लीन होने की प्रेरणा देता है।