🌿 झूला पड़ो रे कदम की डार झुलावे ब्रज नारी Lyrics | सावन स्पेशल राधा कृष्ण झूला भजन
झूला पड़ो रे कदम की डार झुलावे ब्रज नारी एक अत्यंत मधुर और लोकप्रिय सावन स्पेशल राधा कृष्ण भजन है। इस भजन में वृंदावन की मनमोहक झूला लीला, श्री राधा-कृष्ण का दिव्य श्रृंगार और ब्रज की गोपियों का आनंदमय उत्सव वर्णित है। सावन के पावन महीने में यह भजन मंदिरों, कीर्तन, झूला महोत्सव और धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से गाया जाता है।
🎵 झूला पड़ो रे कदम की डार झुलावे ब्रज नारी Lyrics (Hindi)
झूला पड़ो रे कदम की डार, झुलावे ब्रज नारी।
झूला झूलो रे, झूला झूलो रे,
झूला पड़ो रे॥
रेशम की सखी डोरी पड़ी है,
मोतियन से कैसी पटरी जड़ी है।
बामें बैठे नंदकुमार, झुलावे ब्रज नारी।
झूला झूलो रे, झूला झूलो रे,
झूला पड़ो रे॥
मधुर-मधुर श्याम बंसी बजावत,
बंसी बजावत रस बरसावत।
नन्हीं-नन्हीं पड़त है फुहार, झुलावे ब्रज नारी।
झूला झूलो रे, झूला झूलो रे,
झूला पड़ो रे॥
श्याम राधिका झूला झूले,
झूला झूले, हाँ झूला झूले।
गोपी ग्वाल देखकर फूले,
सब गावत हैं मल्हार, झुलावे ब्रज नारी।
झूला झूलो रे, झूला झूलो रे,
झूला पड़ो रे॥
🌸 भजन का भावार्थ
यह भजन श्री राधा-कृष्ण की सावन झूला लीला का सुंदर वर्णन करता है। कदम के वृक्ष पर सजे रेशमी झूले, मोतियों से सजी डोरियाँ, श्रीकृष्ण की मधुर बांसुरी और ब्रज की गोपियों का उल्लास पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देता है। यह भजन भक्तों को वृंदावन की दिव्य झांकी का अनुभव कराता है।
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