LYRICS
लोग पीते है पी पी के गिरते
हम तो पीते है फिर भी न गिरते
हम तो पीते है सत्संग का प्याला
ये अंगूरों के मदिरा नहीं है
लोग खाते है खा खा के सोते
हम तो खाते फिर भी न सोते
हम तो कहते है माखन और मिश्री
कोई इडली या डोसा नहीं है
शीसा टुटा तो सबने देखा
दिल टुटा किसी ने न देखा
दिल टुटा है देखो हमारा
इसकी आवाज़ आती नहीं है
आंख वालो ने तुमको देखा
कण वालो ने तुमको सुना है
तुमको देखा नहीं है उसी ने
जिसकी आँखों पे पर्दा पड़ा है
लोग मथुरा वृन्दावन जाते
वहां पे जा केर के राधे राधे गाते
वहां झूटी अदालत नहीं है वहां सच्ची आदलत लगी है
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