कावड़ से प्यार हो गया

 हो हो हो तेरी कावड़ से प्यार हो गया



हरिद्वार से जल भर लाई तेरे द्वार पर आई हूँ
देख के तेरी जटा में गंगा फूली न समाई हूँ
हो हो तेरी गंगा का दीदार हो गया

घिस घिस मैं तो चंदन लाई भर के कटोरा लाई हूँ
देखा तेरे माथे पे चंदा फूली न समायी हूँ
हो हो हो तेरे चंदा का दीदार हो गया

एक फूलों का हार बनाया तेरे दर पर आई हूँ
देख के तेरे सर्पों की माला फुली ना समाई हूँ
हो हो हो तेरे सर्पों का दीदार हो गया

मेवा और मिष्ठान लेकर भोग लगाने आई हूँ .
देखा तेरा भांग धतूरा फुली ना समाई हूँ
हो हो तेरी भंगिया का दीदार हो गया

ढोलक और मंजीरा लेकर तेरे दर पर आई हूँ .
तेरे हाथ में डमरू देखकर फुले ना समाई हूँ .
हो हो तेरे डमरू का दीदार हो गया

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