शिवशंकर जे डमरू वाले | उमापति जग से निराले | शिव भजन लिरिक्स | Shiv Shankar Je Damru Wale
शिवशंकर जे डमरू वाले | उमापति जग से निराले | शिव भजन | Shiv Shankar Je Damru Wale | Mahadev Bhajan Lyrics 2026
शिवशंकर जे डमरू वाले, उमापति जग से निराले भगवान भोलेनाथ की महिमा का अत्यंत सुंदर और भक्तिमय शिव भजन है। इस भजन में भगवान शिव के डमरूधारी, त्रिशूलधारी, नागेश्वर, विश्वनाथ, अमरनाथ और करुणामय स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यदि आप शिव भजन, महादेव भजन, भोलेनाथ के भजन, सावन स्पेशल भजन, शिव जी के लोकभजन और भक्ति गीत पसंद करते हैं, तो यह भजन अवश्य सुनें और अपने प्रियजनों के साथ साझा करें।
॥ शिव भजन लिरिक्स ॥
शिवशंकर जे डमरू वाले,
उमापति जग से निराले॥
1.
विश्वनाथ नागेश्वर गिरजा के सैयाँ,
नग-नग में सोह रहीं बिच्छू ततैयां।
लिपटे हैं नाग राज काले,
उमापति जग से निराले॥
2.
कर में त्रिशूल, गले मुंडन की माला,
बैल पे सवार, कसें मृगा की छाला।
माथे पे चन्द्र के उजाले,
उमापति जग से निराले॥
3.
मेवा मिष्ठान कछु इनको न भाए,
भांग धतूरा तो खूबई सुहाए।
पीते हलाहल के प्याले,
उमापति जग से निराले॥
4.
चिता भस्म अंग सोहे बैठे अविनाशी,
घट-घट में वास करते मरघट निवासी।
अमरनाथ सबके रखवाले,
उमापति जग से निराले॥
5.
देव, मुनि, असुरों के भाग संवारे,
दीनों और दुखियों को तुम भव से तारे।
मेरी नैया तोरे हवाले,
उमापति जग से निराले॥
हर-हर महादेव!
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